ज़माने भर के ग़मो की दवा है ज़माने मै मगर
फक़त इस दर्द- ए- दिल का इलाज नही है
मुम्किन है कल जहानो की खुशिया हो दामन मे
ये खलिश रहेगी के वो मेरे पास आज नही है
उनकी फितरत होगी अमानते लेकर भूल जाने की
अपने साये से कट जाये हम ऐसा भी मिजाज़ नही है
हमने धडकनो की वसीयते उनके नाम कर रखी है
बेदखल करे वो लकीरो से हमको कोई ऐतराज़ नही है
शनिवार, 19 सितंबर 2009
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