आपसे कुछ कहने का जब जब ख्याल आया है,
पहले बड़े जतन से हमने लफ्जों को सजाया है,
राह में अचानक जब आप नज़र आते हैं,
होठों पर सजाये सारे बोल बिखर जाते हैं,
फिर सोचने लगते हैं कैसे शुरुआत करें ,
आखिर कैसे जाहिर करें हम अपने दिल कि बात,
जब कुछ कहने को होते हैं तो आप गुज़र जाते हैं,
हार करा जज़्बात कागज़ पर सजाये जाते हैं,
यूँ तो ज्यादा नहीं बस इतनी सी फरमाइश है मेरी,
एक साफ़ सुथरी दोस्ती कि ख्वाहिश है मेरी,
माफ़ कर दीजियेगा अगर ये हमारी भूल है,
एहसान होगा आपका जो ये दोस्ती कबूल है......
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