बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

मेरे दिल कि बात

 आपसे कुछ कहने का जब जब ख्याल आया है, 
पहले बड़े जतन से हमने लफ्जों को सजाया है,
राह में अचानक जब आप नज़र आते हैं,
होठों पर सजाये सारे बोल बिखर जाते हैं, 
फिर सोचने लगते हैं कैसे शुरुआत करें ,
आखिर कैसे जाहिर करें हम अपने दिल कि बात, 
जब कुछ कहने को होते हैं तो आप गुज़र जाते हैं, 
हार करा जज़्बात कागज़ पर सजाये जाते हैं,
यूँ तो ज्यादा नहीं बस इतनी सी फरमाइश  है मेरी,
एक साफ़ सुथरी दोस्ती कि ख्वाहिश है मेरी,
माफ़ कर दीजियेगा  अगर ये हमारी भूल है,
एहसान होगा आपका जो ये दोस्ती कबूल है......
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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2009

तेरा हो लूँ पहले .....



 मैं आसमा में उड़ना तो चाहता हूँ , पर धरती का क़र्ज़ चूका लूँ पहले.
दुनिया जीतने कि हसरत तो है मेरे  दिल में , पर तुझ पर सब कुछ लुटा लूं पहले.
उँगलियों पर सबको नचाने कि चाहत सही , तेरे इशारे पे मैं नाच लूँ पहले.
दुनिया मेरी होगी और मैं दुनिया का, दो पल को बस तेरा हो लूँ आज पहले


बस तू ही तू है जीवन में

तेरी यादों में ख़ोए रातों को अक्सर सो नही पाए,
कभी पलकों से तेरी झलकों को हम खो नहीं पाए,
जमाने को ख्वाहिश थी हमें अपना बनाने की
हमारी ख्वाहिशें तुम तक, तुम्हारे हो नहीं पाए।




मोहब्ब्त है तुम्ही से, पर कहाँ हिम्म्त है कहने की,
यादों के भँवर दिल मे- कहाँ दिक्कत है सहने की,
डर इस बात का है कि तू कहीं इनकार न कर दे
खुशफ़हमी का मज़ा कुछ और तुझे अपना समझने की।


एक शिकन अकेलेपन की…
महफ़िल में साथ देनेवाले कम ही नहीं होते,
औ तन्हाई में अब मयस्सर गम भी नहीं होते।