सोमवार, 21 सितंबर 2009

सपना तब तक ही सुंदर है

सपना तब तक ही सुंदर है।
जब तक आँखों के अंदर है।
खुशियों को सहेज कर रखना
उनके खो जाने का डर है।
बुरे वक़्त में दुःख ही है, जो
साथ निभाने को तत्पर है।
रिश्तों का बनना आसां है
रिश्तों का बचना दुष्कर है।
इंसानों की मुश्किल ये है
उनके भीतर हमलावर है।

सब कुछ अपने मन का ही हो

सब कुछ अपने मन का ही हो, ऐसा कब होता है
गतिरोधों से टकरा कर, जीवन संभव होता है

पलकों तक आए और मन में, हलचल पैदा नहीं करे
ऐसा आँसू ज़िंदा हो कर भी एक शव होता है।

एकाकी लोगों से पूछो तो शायद यह पता चले
सूनेपन के अंदर-अंदर भी कलरव होता है

भली-भली बातों से कोई अच्छी कथा नहीं बनती
श्याम रंग का श्वेतों में गहरा मतलब होता है।

सुख-दुःख में जो साथ चले हैं

सुख-दुःख में जो साथ चले हैं
मीत यहाँ ऐसे विरले हैं
देखो नफ़रत की आतिश में
जाने कितने ख़्वाब जले हैं
और रखे क्या सामां पथ में
लेकर तेरी याद चले हैं
क्या लेना हमको बरसों से
पल में जी कर लौट चले है
धूप खिली है  ख़ुशियों की
ग़म के बादल लौट चले हैं

रिश्तों से अब डर लगता है

रिश्तों से अब डर लगता है।
टूटे पुल-सा घर लगता है।
चहरों पे शातिर मुस्कानें
हाथों में ख़ंजर लगता है।
संग हवा के उड़ने वाला
मेरा टूटा पर लगता है।
हथियारों की इस नगरी में
जिस्म लहू से तर लगता है।
जीवन के झोंकों पर तेरा
साथ हमें पल भर लगता है।
सारा जग सिमटा घर में तो
घर जग के बाहर लगता है।

तुम बिन यदि मैं भटक गया तो............


तुम चाहो, मत प्रीत जताना
तुम चाहो, आगोश न देना
तुम बिन यदि मैं भटक गया तो
मुझको कोई दोष न देना।

दुनिया भर की रीत निभाओ
मुझसे बँधकर क्या पाओगी
सच पूछो विश्वास नहीं कि
मेरा दर्द बँटा पाओगी
मैं तो कब का छोड़ चुका हूं
लेकर नाम तेरा संसार
मेरे साथ है जीता-मरता
इक तेरा मुट्ठी भर प्यार
मुझे न दुनियादारी भायी
मुझको तुम ये होश न देना।

मैं तो अब तक चलता आया
तेरी सुधि की बाँह गहे
पथिक कोई मिल जाए राह में
साथ चल पड़े कौन कहे
संभव है कि बिसरा दूँ मैं
तुझ पर लिखे हुए सब गीत
और तेरा विश्वास तोड़ दूँ
भूले से मेरे मनमीत
तुम्हें भुलाकर भी मैं जी लूँ
मुझको ये संतोष न देना।

              -- by : ........

जी भर के आज जी लो

बहुत गुज़र चुकी है थोड़ी सी रह गई है
जितनी भी उम्र बाकी, हमसे यह कह रही है
जी भर के आज जी लो,कल की ख़बर नहीं है।
खूबसूरत खिजां का मौसम, और झील का किनारा
ठंडी हवा के झोंके, मौसम है कितना प्यारा
है अगर कोई जन्नत, वो जन्नत यहीं है
जितनी भी उम्र बाकी हमसे यह कह रही है
जी भर के आज जी लो,कल की ख़बर नहीं है।
बेशक है बाहर सरदी, धूप घर में आ रही है
यह कुदरत ख़ुदा की, मेरे मन को भा रही है
जो हुक्म है ख़ुदा का, वो सब का सब सही है
जितनी भी उम्र बाकी हमसे यह कह रही है
जी भर के आज जी लो,कल की ख़बर नहीं है।
हर जीव को है भाई, है ऋतु बसंत आई
फूलों में है सुगन्धि, मौसम बहार लाई
जो सुवास आ रहा है, सत्य तो वही है
जितनी भी उम्र बाकी हमसे यह कह रही है
जी भर के आज जी लो, कल की ख़बर नहीं है।
है गरमी का आज मौसम, और लू भी चल रही है
आया है खूब पसीना,  दोपहर हो रही है
मेरे जिस्म की ताकत, सब कुछ यह सह रही है
जितनी भी उम्र बाकी हमसे यह कह रही है
जी भर के आज जी लो,कल की ख़बर नहीं है ।

                      -- by : ............

पा नहीं सकते


दूर हम तुमसे जा नहीं सकते
शर्त ये भी है पा नही सकते

किसी को अपने आँसुओं का सबब
लाख चाहे बता नहीं सकते

जिस पे लिक्खी है इबारत कोई
हम वो दीवार ढा नही सकते

उसको रिश्तों से है नफ़रत शायद
कोई रिश्ता बना नहीं सकते

                      

मुझे प्यार भी दो....


धूप ही क्यों
धूप ही क्यों छांव भी दो
पंथ ही क्यों पांव भी दो
सफर लम्बी हो गई अब,
ठहरने को गांव भी दो ।

प्यास ही क्यों नीर भी दो
धार ही क्यों तीर भी दो
जी रही पुरुषार्थ कब से,
अब मुझे तकदीर भी दो ।

पीर ही क्यों प्रीत भी दो
हार ही क्यों जीत भी दो
शुन्य में खोए बहुत अब,
चेतना को गीत भी दो ।

ग्रन्थ ही क्यों ज्ञान भी दो
ज्ञान ही क्यों ध्यान भी दो
तुम हमारी अस्मिता को,
अब निजी पहचान भी दो ।
                      

           

HaQeekat.....

क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता

कोई सह लेता है कोई कह लेता है
क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता

आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता

क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता

कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता.
.