सोमवार, 21 सितंबर 2009
तुम बिन यदि मैं भटक गया तो............
तुम चाहो, मत प्रीत जताना
तुम चाहो, आगोश न देना
तुम बिन यदि मैं भटक गया तो
मुझको कोई दोष न देना।
दुनिया भर की रीत निभाओ
मुझसे बँधकर क्या पाओगी
सच पूछो विश्वास नहीं कि
मेरा दर्द बँटा पाओगी
मैं तो कब का छोड़ चुका हूं
लेकर नाम तेरा संसार
मेरे साथ है जीता-मरता
इक तेरा मुट्ठी भर प्यार
मुझे न दुनियादारी भायी
मुझको तुम ये होश न देना।
मैं तो अब तक चलता आया
तेरी सुधि की बाँह गहे
पथिक कोई मिल जाए राह में
साथ चल पड़े कौन कहे
संभव है कि बिसरा दूँ मैं
तुझ पर लिखे हुए सब गीत
और तेरा विश्वास तोड़ दूँ
भूले से मेरे मनमीत
तुम्हें भुलाकर भी मैं जी लूँ
मुझको ये संतोष न देना।
-- by : ........
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें