दूर इन गलियों में किसी का आना जाना नहीं होता ,
कभी ख़ुशी का तो कभी मेरा ठिकाना नहीं होता ,
निकलता है सूरज रोज़ उसी जगह से
पर जाने क्यों इस दिल में रौशनी का आना जाना नहीं होता ….
कहते है मोहब्बत का कोई मुकाम तीय नहीं होता,
दुनिया में इश्क वालों का अंजाम तय नहीं होता ,
तकदीर ऊपर वाला ही लिखता है सबकी
किसी को वफ़ा तो किसी को सहारा नहीं मिलता ...
....................................................... उषा निश्छल
रविवार, 20 दिसंबर 2009
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