सोमवार, 29 मई 2023

एक बचपन का ज़माना था


 

एक बचपन का ज़माना था,

जहाँ खुशियों का खज़ाना था | 

चाहत चाँद को पाने की, 

और दिल तितली का दीवाना था | 

खबर नहीं थी सुबह की,

ना शाम का ठिकाना था | 

थक कर आना स्कूल से ,

पर खेलने भी जाना था | 

माँ की कहानी थी ,

परियों का फसाना था | 

कागज़ की नाव थी ,

हर मौसम सुहाना था | 

रोने की कोई वजह न थी ,

न हँसने का बहाना था | 

क्यों हम इतने बड़े हो गए,

खुशियों से क्यों दूर हो गए | 

कितना अच्छा बचपन था,

वो एक बचपन का ज़माना था 


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